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प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट

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वलसाड में गोल्ड लोन

वलसाड, जो पहले बुलसर के नाम से जाना जाता था, गुजरात राज्य में स्थित एक शहर है. पिछले कुछ दशकों में, वलसाड वस्त्र, केमिकल, पेपर और लुगदी उद्योगों का गढ़ बन कर उभरा है.

इस शहर के निवासी के रूप में, अगर आपके ऊपर कोई प्रोफेशनल या पर्सनल दायित्व है, तो आप बजाज फिनसर्व से वलसाड में तुरंत गोल्ड लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हमारी ब्रांच में जाएं या ऑनलाइन अप्लाई करें.

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वलसाड में गोल्ड लोन की विशेषताएं और लाभ

बजाज फिनसर्व का गोल्ड लोन कई विशेषताओं और लाभों के साथ आता है, जैसे:

पार्ट रिलीज सुविधा

बजाज फिनसर्व के साथ, आप समान राशि का पुनर्भुगतान करने के बाद अपने गिरवी रखे गए आइटम को आंशिक रूप से रिलीज़ कर सकते हैं. इस संबंध में, हमारा ऑनलाइन गोल्ड लोन कैलकुलेटर आपको पहले से ही अपने खर्चों को समझने और प्लान करने में मदद कर सकता है.

पर्याप्त लोन राशि

हम रु. 2 करोड़ तक का गोल्ड लोन प्रदान करते हैं, जिससे आप अपने प्रोफेशनल या पर्सनल फाइनेंशियल दायित्वों की देखभाल कर सकते हैं.

फोरक्लोज़र और पार्ट-प्री-पेमेंट के विकल्प

हमारे साथ, आप बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपने लोन को फोरक्लोज़ या पार्ट-प्री-पे कर सकते हैं.

सर्वश्रेष्ठ सिक्योरिटी प्रोटोकॉल

बजाज फिनसर्व आपके गिरवी रखे गए गोल्ड आइटम को मोशन डिटेक्टर से लैस रूम में अत्याधुनिक वॉल्ट के अंदर लॉकर में सुरक्षित रखता है, जिसकी निरंतर निगरानी की जाती है.

गोल्ड इंश्योरेंस

जब आप हमसे गोल्ड लोन लेते हैं, तो हम आपके द्वारा गिरवी रखे गए आइटम को गुम होने या चोरी होने के जोखिम प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक कॉम्प्लीमेंटरी गोल्ड इंश्योरेंस भी प्रदान करते हैं.

सोने का पारदर्शी मूल्यांकन

इसके अलावा, बजाज फिनसर्व अत्यधिक सटीकता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए इंडस्ट्री-ग्रेड कैरेट मीटर के साथ आपके सोने के आइटम का मूल्यांकन करता है.

सुविधाजनक पुनर्भुगतान विकल्प

बजाज फिनसर्व आपको अपनी सुविधा के अनुसार चुनने के लिए विभिन्न लोन पुनर्भुगतान विकल्प प्रदान करता है. इस संबंध में, हमारा गोल्ड लोन ईएमआई कैलकुलेटर आपको अपनी पुनर्भुगतान क्षमता जानने में मदद कर सकता है.

वस्त्र और केमिकल के अलावा, वलसाड गुजरात का बागवानी केंद्र भी बन रहा है. इस शहर में सात इंडस्ट्रियल एस्टेट भी हैं, जो डूंगरा, धरमपुर, पारदी, भिलाड, उम्बरगांव, वलसाड, वापी और सरिगम में स्थित हैं. ये इस शहर में रोज़गार और इन्वेस्टमेंट के अवसरों को आसान बनाते हैं.

फंड की तुरंत आवश्यकता वाले वलसाड निवासी बजाज फिनसर्व से गोल्ड लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हम वलसाड में आकर्षक ब्याज दरों पर तुरंत गोल्ड लोन प्रदान करते हैं.

ITR Filing Last Date: ऐसे डाउनलोड करें AIS और TIS, फिर चुटकियों में खुद फाइल कर पाएंगे ITR

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में एआईएस (AIS) यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement) और टीआईएस (TIS) यानी टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (Taxpayer Information Summary) की शुरुआत की है. डिपार्टमेंट ने इनकी शुरुआत आईटीआर फाइलिंग में पारदर्शिता लाने और टैक्सपेयर्स के लिए चीजें सरल बनाने के लिए की है.

ITR भरने से पहले जरूर देखें AIS/TIS

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2022,
  • (अपडेटेड 29 जुलाई 2022, 4:30 PM IST)
  • 31 जुलाई है ITR भरने की अंतिम तारीख
  • अब तक करीब 4 करोड़ लोगों ने भरा ITR

फाइनेंशियल ईयर 2021-22 (FY22) यानी असेसमेंट ईयर 2022-23 (AY23) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने (Income Tax Return Filing) की डेडलाइन में अब महज दो दिन बाकी हैं. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) इस बात के संकेत दे चुका है कि डेडलाइन (ITR Filing Deadline) को बढ़ाने के बारे में कोई विचार नहीं चल रहा है. विभाग लोगों से लगातार कह रहा कि डेडलाइन का इंतजार किए बिना फटाफट अपना आईटीआर फाइल कर दें. आईटीआर भरने की डेडलाइन 31 जुलाई 2022 है और अब तक करीब 4 करोड़ लोगों ने ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है. इस बार से आईटीआर फाइलिंग के कुछ नियमों (ITR Filing Rules) में बदलाव किया है. आईटीआर भरने से पहले इनके बारे में जान लेना जरूरी है, ताकि आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस (Income Tax Notice) न थमा दे.

इस डॉक्यूमेंट ने ITR Filing को किया आसान

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में एआईएस (AIS) यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement) और टीआईएस (TIS) यानी टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (Taxpayer Information Summary) की शुरुआत की है. डिपार्टमेंट ने इनकी शुरुआत आईटीआर फाइलिंग में पारदर्शिता लाने और टैक्सपेयर्स के लिए चीजें सरल बनाने के लिए की है. इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले कुछ कागजात को तैयार रखने की जरूरत है. इन कागजातों में फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, बैंक से मिला इंटेरेस्ट सर्टिफिकेट, अगर होम लोन है तो उसका स्टेटमेंट, कोई डिडक्शन है तो उसके डिटेल्स, डीमैट अकाउंट के प्रॉफिट और लॉस का स्टेटमेंट, 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (Annual Information Statement), अगर टैक्स चालान भरा गया है तो उसके डिटेल्स, अगर प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट कोई डोनेशन दिया गया है तो उसके डिटेल्स, अगर अन्य स्रोतों से आय है तो उसके डिटेल्स आदि शामिल हैं. इनमें बाकी चीजें तो पुरानी हैं, लेकिन एआईएस नया है.

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क्या होता है एआईएस और टीआईएस

नए एआईएस फॉर्म में टैक्सपेयर्स को अलग-अलग माध्यमों से हुई सारी कमाई का ब्यौरा दिया रहता है. इनमें सेविंग अकाउंट से ब्याज के रूप में हुई कमाई (Saving Account Interest Income), रेकरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट से इनकम (Recurring and Fixed Deposit Income), डिविडेंड के रूप में मिले पैसे (Income From Dividend), म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) समेत सिक्योरिटीज के लेन-देन से हुई आय, विदेश से मिले पैसे आदि शामिल हैं. आईटीआर फाइलिंग को आसान बनाने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टीआईएस की शुरुआत की है. इसमें टैक्सपेयर्स को टैक्सेबल राशि (Taxable Amount) की एकमुश्त जानकारी मिल जाती है. पहले विभाग ने इसे ट्रायल के आधार पर शुरू किया था, अब इसे कंपल्सरी कर दिया गया है.

एक ही जगह सभी इनकम की जानकारी

आम तौर पर लोग खासकर वेतनभोगी वर्ग फॉर्म-16 (Form-16) के आधार पर आईटीआर फाइल कर देता है. हालांकि इसके अलावा भी कई तरह के इनकम और यहां तक कि गिफ्ट भी इनकम टैक्स के दायरे में आते हैं. एआईएस और टीआईएस यहीं पर टैक्सपेयर्स के लिए मददगार साबित होता है. एआईएस में आपको सैलरी के अलावा अन्य स्रोतों से हुई हर उस कमाई का ब्यौरा मिल जाता है, जिन्हें इनकम टैक्स एक्ट 1961 (Income Tax Act 1961) के तहत स्पेसिफाई किया गया है. मतलब इसमें हर उस इनकम की जानकारी मिलेगी, जो टैक्सेबल कैटेगरी में आती है. सरल शब्दों में कहें तो किसी एक फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के दौरान किए गए सारे वित्तीय लेन-देन (Financial Transaction) के डिटेल्ड स्टेटमेंट को एआईएस कह सकते हैं. टीआईएस इसी प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट का सारांश होता है.

ऐसे डाउनलोड करें एआईएस/टीआईएस (How to Download AIS/TIS).

कंपनी के पीएंडएल स्टेटमेंट और बैलेंस शीट में आपको क्या देखना चाहिए?

कंपनियां नियमित रूप से तीन तरह के फाइनेंशियल स्टेटमेंट जारी करती हैं. इनमें बैलेंस शीट और पीएंडएल स्टेटमेंट बहुत अहम हैं.

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इन जानकारियों के आधार पर कर्जदाता, विश्लेषक और निवेशक कंपनी की आर्थिक स्थिति को समझते हैं. फिर वे बिजनेस ग्रोथ की संभावना के आधार पर फैसले लेते हैं.

उपर्युक्त जानकारियों के आधार पर कर्जदाता, विश्लेषक और निवेशक कंपनी की आर्थिक स्थिति को समझते हैं. फिर वे बिजनेस ग्रोथ की संभावना के आधार पर फैसले लेते हैं. आइए जानते हैं पीएंडएल स्टेटमेंट और बैलेंसशीट में आपको किन बातों पर नजर प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट रखनी चाहिए.

पीएंडएल और बैलेंस शीट दोनों मिलकर कंपनी की वित्तीय सेहत के बारे में बताते हैं. बैलेंस शीट निवेशकों और कर्जदाताओं को यह जानकारी देती है कि कंपनी अपने संसाधनों का इस्तेमाल कितनी कुशलता से कर रही है. वह कैसे अपने संसाधन का उपयोग कर रही है.

कंपनी की बैलेंस शीट के विश्लेषण से रेवेन्यू, एसेट्स और प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट कंपनी की देनदारी के बारे में सटीक जानकारी मिलती है. दूसरी तरफ, पीएंडएल स्टेटमेंट से आय, लागत और निर्धारित अवधि में खर्च की जानकारी मिलती है. कामकाज के लिहाज से पीएंडएल अधिक अहम होता है, जबकि रणनीति बैलेंस शीट के आधार पर बनाई जाती है.

समीक्षा के समय सिर्फ मुनाफा और घाटे की जानकारी आपको कंपनी के कामकाज के बारे में बता सकती है. मगर बैलेंस शीट यह दिखाती है कि क्या भविष्य में कंपनी के पास इस प्रदर्शन को जारी रखने के लिए पर्याप्त फंड है या नहीं.

जब भी अर्थव्यवस्था कमजोर होती है, तो कंपनियों की कमाई गिरती है, कर-बाद-मुनाफे में कमाई आती है और प्रति शेयर आय भी निगेटिव हो जाती है. इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि कंपनी कमजोर है और उसमें ग्रोथ की क्षमता नही है. ऐसी स्थिति में बैलेंस शीट काम आती है, तो आपको सही तस्वीर साझा करती है.

नकदी, छोटी अवधि के निवेश, कम और शून्य दीर्घावधि कर्ज, एसेट्स की अंडरवैल्यूएशन जैसी अन्य वजहों के चलते निवेशकों को बैलेंस शीट पर जोर देना चाहिए. हालांकि, इस बात पर भी गौर करना जरूरी है कि हर कंपनी दूसरी कंपनी से अलग होती है और उसका बिजनेस भी भिन्न होता है.

निवेशकों का मुख्य उद्देश्य होता है कि वे कंपनियों के शेयरों से पैसा कमाए. इसका सबसे बढ़िया तरीका है कि वे पीएंडएल और बैलेंस शीट दोनों ही पैमानों पर कंपनी की सफलता का आंकलन करें. दोनों से पता चलता है कि कंपनी में निवेश करना चाहिए या नहीं.

निवेशकों के नजरिए से कुल मुनाफे या घाटा का खाता अधिक महत्वपूर्ण होता है, जिसमें उसके तमाम कारोबार, ज्वाइंट वेंचर और सहयोगियों का लेखा जोखा होता है. इसमें पूरी जानकारी विस्तृत रूप से दी होती है और इसी वजह से निवेशक इसे तरजीह देते हैं.

(डीके अग्रवाल एसएमसी इंवेस्टमेंट एंड एडवाइजर्स के चेयरमैन और एमडी हैं. इस लेख में दिए गए विचार उनके निजी हैं. ईटी मार्केट्स हिंदी का इन विचारों प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट से सहमत होना अनिवार्य नहीं है.)

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LIC की बैलेंसशीट में दिख सकता है 6028 करोड़ रुपये का लॉस, जानिए क्या है पूरा मामला

31 दिसंबर, 2021 को खत्म 9 महीनों मे एलआईसी को 1,715 करोड़ रुपये प्रॉफिट हुआ है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इसकी वजह यह हो सकती है कि एलआईसी ने आईपीओ से पहले मार्क-टू-मार्केट लॉस को अपने प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में शामिल नहीं किया होगा

एनालिस्ट्स का कहना है कि LIC को 6,028 करोड़ रुपये के लॉस को खत्म करने में दिक्कत नहीं आएगी। वह अपने कुछ एसेट्स को बेचकर इस लॉस की भरपाई कर सकती है। लेकिन, इसका कंपनी के पॉलिसीहोल्डर्स के रिटर्न पर खराब असर पडे़गा।

LIC को 6,028 करोड़ रुपये का मार्केट टू मार्केट लॉस हुआ है। कंपनी को अगले साल 31 जनवरी तक इसे अपने फाइनेंशियल रिजल्ट में शामिल करना होगा। एलआईसी ने सेबी को जो फाइनल डॉक्युमेंट भेजा है, उसमें यह जानकारी दी गई है। एलआईसी का IPO 4 मई को ओपन होगा।

मार्क-टू-मार्केट लॉस या प्रॉफिट के नियम तय हैं। कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल बॉन्ड्स या स्टॉक्स जैसे एसेट्स की मार्केट वैल्यू की जानकारी अपने इकनम स्टेटमेंट में देनी पड़ती है। अगर कंपनी इस एसेट को तुरंत बेचने वाली हो, तो भी उसके लिए इसकी मार्केट वैल्यू की जानकारी देनी जरूरी है। इसका मकसद फाइनेंशियल स्टेटमेंट को पारदर्शी बनाना है।

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31 दिसंबर, 2021 को खत्म 9 महीनों मे एलआईसी को 1,715 करोड़ रुपये प्रॉफिट हुआ है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इसकी वजह यह हो सकती है कि एलआईसी ने आईपीओ से पहले मार्क-टू-मार्केट लॉस को अपने प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में शामिल नहीं किया होगा। दरअसल, इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDA ने एलआईसी को इनवेस्टमेंट पर हुए लॉस की जानकारी अपने इनकम स्टेटमेंट में देने के लिए अगले साल जनवरी तक का समय दिया है।

हालांकि, एलआईसी के पास काफी एसेट्स हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि उसे 6,028 करोड़ रुपये के लॉस को खत्म करने में दिक्कत नहीं आएगी। वह अपने कुछ एसेट्स को बेचकर इस लॉस की भरपाई कर सकती है। लेकिन, इसका कंपनी के पॉलिसीहोल्डर्स के रिटर्न पर खराब असर पडे़गा। इसलिए कंपनी इस काम को इस तरह से करना चाहेगी, जिससे पॉलिसीहोल्डर्स के हितों पर खराब असर नहीं पड़े।

एलआईसी के फाइनल आईपीओ डॉक्युमेंट में कहा गया है कि कई बार कोशिश करने के बावजूद एलआईसी सेकेंडरी मार्केट में सिक्योरिटी बेचने में नाकाम रही है। उसके आईपीओ प्रॉस्पेक्टस में यह भी कहा गया है कंपनी ने इन इनवेस्टमेंट को शेयरहोल्डर्स के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया है, जो रेगुलेटरी नॉर्म का उल्लंघन है।

एलआईसी ने कहा है कि मिसप्राइस्ड इंश्योरेंस पॉलिसीज के 11,264 करोड़ रुपये के डेट पेपर्स में से 5,350.6 करोड़ रुपये के पेपर्स नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स हो चुके हैं। इसके लिए फुल प्रोविजनिंग की जा चुकी है। अगर इस ट्रांजेक्शन को बैलेंसशीट में दिखाया जाता है तो एलआईसी को 6,028 करोड़ रुपये का लॉस दिखाना होगा।

MoneyControl News

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First Published: Apr 29, 2022 4:36 PM

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Class Doubts - Module 3 - Hindi Batch

यह एक आम कहावत है की किसी भी चीज़ को महान बनने के लिए उसकी नींव का मजबूत होना बहुत ज़रूरी है। जिस आधार या स्तम्भ पर कोई वस्तु बनी हो या खड़ी हो, वह इतनी मज़बूत होनी चाहिए कि कोई भी वस्तु उसकी पहचान को हिला न सके। उसी तरह, फंडामेंटल एनालिसिस भी किसी व्यवसाय के कामकाज को उसके सबसे बुनियादी स्तर पर समझने की एक प्रक्रिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्वेस्टमेंट के लिए व्यवसाय का सही मूल्य क्या है, यह जानने के लिए कि क्या यह कम या अधिक है। किसी भी व्यक्ति को किसी भी कंपनी का मूल्यांकन करने से पहले उस कंपनी के बिजनेस मॉडल को समझना चाहिए और इन्वेस्टमेंट से पहले उस कंपनी को एनालाइज ज़रूर करना चाहिए।

फंडामेंटल एनालिसिस में क्वालिटेटिव एंड क्वांटिटेटिव एनालिसिस दोनों शामिल होते है। क्वालिटेटिव एनालिसिस के लिए आपको कंपनी मैनेजमेंट को समझने की ज़रूरत है और साथ ही कंपनी के फंडामेंटल्स ऑफ़ बिज़नेस को समझने के लिए आपको उस बिज़नेस को चलाने वाले लोगो की मंशा को जानने की आवश्यकता है। नंबर्स साइड पर, आपको फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स को समझने की आवश्यकता है जो किसी कंपनी की फाइनेंसियल परफॉरमेंस एंड बिज़नेस एक्टिविटीज को दर्शाते है और उस कंपनी की FD के द्वारा जो प्रोफिटेबिलिटी है जैसे की बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लोस्स स्टेटमेंट, कॅश फ्लो स्टेटमेंट आदि और कंपनी के रिटर्न्स को समझने और तुलना करने में सहायता करते है। ये सब एनालिसिस करने के बाद आप इंवेस्टमनेट के लिए किसी भी बिज़नेस की राइट वैल्यू का पता कर सकते है।

यह किसी भी गैजेट को खरीदने से पहले ब्रांड का नाम, ब्रांड ट्रस्ट, ब्रांड परफॉरमेंस, लागत, वारंटी की अवधि आदि की तलाश करने के समान है। और अंत में, आप तय करते हैं कि क्या यह खरीदने लायक है। हमारे पास जितने भी चोइसस हैं, उनमें से कोई भी निर्णय लिया जा सकता है जो की सही भी हो सकता है या गलत भी हो सकता है।

और यही कारण है कि फंडामेंटल एनालिसिस को मेरे कोर्स के Module 3 के रूप में शामिल करना महत्वपूर्ण था, “ए कम्पलीट कोर्स ऑन इंडियन स्टॉक मार्किट।

हम हमेशा अपने पास मौजूद सभी विकल्पों के बीच इन्फोर्मेड निर्णय लेना पसंद करते हैं और नंबर्स ऐसे निर्णय लेने में हमारी मदद करती हैं। गट फीलिंग्स के आधार पर निर्णय नहीं लेना चहिये, इसके बजाय एक्सएक्ट नंबर्स पर जाना चाहिए। हमेशा ट्रेंड्स को देखें और ट्रेंड्स को analyse करने का प्रयास करें।

Module 3 में फंडामेंटल एनालिसिस से संबंधित सभी टॉपिक्स बहुत ही सरल भाषा में हैं। Module 3 में चैप्टर्स हैं-

क्लास 21। इंट्रोडक्शन to फंडामेंटल एनालिसिस।

क्लास 22। क्वालिटेटिव एनालिसिस क्या होता है?

क्लास 23। बैलेंस शीट के बारे में जानिए।

क्लास 24। प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट के बारे में जानिए।

क्लास 25। कैश फ्लो स्टेटमेंट के बारे में जानिए।

क्लास 26। Ratio Analysis – पार्ट 1।

क्लास 27। Ratio Analysis – पार्ट 2।

क्लास 28। Ratio Analysis – पार्ट 3।

क्लास 29। Ratio Analysis – पार्ट 4।

क्लास 30। Ratio Analysis - पार्ट 5।

क्लास 31। Stock में निवेश करने के 4 तरीके।

एक बार जब आप कॉंफिडेंट हो जाएं और नंबर्स देखना स्टार्ट कर दें, तो कंपनियों के करैक्टर और कंपनी की क्वालिटी को समझना शुरू कर देंगे। आपके लिए कुछ फिल्ट्रेशन करना आसान होगा और आप आसानी से समझने लगेंगे कि कंपनी के भीतर होने वाली हर गतिविधि या तो कंपनी के लिए पैसा लाती है या फिर कंपनी से पैसे बाहर ले जाती है।

अगर आपने मेरे कोर्स, "ए कम्पलीट कोर्स ऑन इंडियन स्टॉक मार्किट ", में एनरोल किया है और आपको Module 3 के किसी भी वीडियो क्लासेज से रिलेटेड कोई भी डाउट है तो आप यहां इस ब्लॉग के नीचे कमेंट करके पूछ सकते है।

वैसे तो आपको एक zoom link भेजा जायेगा और में भी रेगुलरली डिफरेंट टाइम पर आपके सभी सवालो का जवाब देने के लिए लाइव डाउट सेशंस लेता रहूँगा। साथ ही साथ, आप अपने सवाल यहां भी पूछ सकते है।

हर Module के लिए ऐसे ही एक ब्लॉग बनाया गया है। एक ही आशा है की सवाल पूछते टाइम इस बात का ध्यान रखा जाए की सवाल Module सम्बंधित ही हो और चैप्टर के नाम के साथ ही पुछा जाए।

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