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करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं?

करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं?
News18 हिंदी 15 घंटे पहले News18 Hindi

भारत में, निम्नलिखित में से कौन सा वायदा बाजार आयोग द्वारा नियंत्रित है?

• वायदा बाजार आयोग भारत में कमोडिटी भविष्य के बाजारों का मुख्य नियामक है। एफ.एम.सी. वायदा अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1952 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। यह सितंबर 2013 से आर्थिक मामलों के विभाग, वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करता है।

• वायदा बाजार आयोग एक इकाई है जो भारत में वस्तुओं के भविष्य के बाजारों के संचालन और गतिविधियों की निगरानी और विनियमन करता है।

• एफ.एम.सी. विभिन्न वस्तुओं के लिए व्यापार स्थितियों से संबंधित जानकारी एकत्रित और प्रकाशित करता है। इसलिए, 2 सही उत्तर है।

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Last updated on Nov 4, 2022

SSC CHSL 2022 notification will be released on 6th December 2022. Earlier, the notification was scheduled to be released on 5th November 2022. Candidates can log in to their profiles and check individual marks between 26th November 2022 to 16th November 2022. The SSC is going to release the SSC CHSL notification on 6th December 2022 as declared by SSC. Candidates who have completed Higher Secondary (10+2) can appear for this exam for recruitment to various posts like Postal Assistant, Lower Divisional Clerks, Court Clerk, Sorting Assistants, Data Entry Operators, etc. The SSC Selection Process consists of Computer Based Exam, Descriptive Test and Typing/Skill Test. Recently, the board has released the SSC CHSL Skill Test Result for the 2020 cycle. The candidates who are qualified are eligible to attend the document verification.

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Square Off Meaning in Hindi

बहुत से लोग स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते है लेकिन कुछ ही लोग है जो इसकी बारीकियों को समझते है, ट्रेडिंग में बहुत से शब्दो का इस्तेमाल किया जाता है जिनमें सबसे ज्यादा उपयोग में होने बाला एक शब्द है स्क्वायर ऑफ। तो आइये जानते है square off meaning in hindi.करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं?

स्क्वायर ऑफ क्या होता है?

स्क्वायर ऑफ ट्रेड से बाहर निकलने की एक प्रक्रिया है जिसे इंट्राडे ट्रेडर मार्केट की वोलेटिलिटी (volatility) से होने वाले उतार–चढाव से लाभ कमाने के लिए उपयोग करते हैं।

स्क्वायर ऑफ ट्रेडर के नजरिए से एक सेटेलमेंट शैली है, जहां एक ट्रेडर द्वारा खरीदे गए सभी शेयरों को पूरी तरह से बेच दिया जाता है। इंट्राडे ट्रेडिंग सत्र में स्क्वायर ऑफ अनिवार्य होता है, ताकि यदि ट्रेडर स्वयं अपनी होल्डिंग पोजीशन को बंद नहीं करते हैं, तो अधिकांश स्टॉक ब्रोकर स्वचालित रूप से दोपहर 3:15 बजे से दोपहर 3:20 बजे के बीच, ट्रेडों को बंद कर देते हैं।

स्क्वायर-ऑफ का उद्देश्य होल्डिंग ट्रेडों को पूरा करना है। इसका मतलब यह है कि आपके द्वारा सुबह खरीदा या बेचा गया कोई भी इंट्राडे ट्रेड स्टॉक मार्केट बंद होने से पहले बेचा या वापस खरीदा जाना चाहिए।

उदाहरण,

मान लीजिए ट्रेडर X 500 रुपये प्रति शेयर प्राइस पर SBI के 100 स्टॉक खरीदने के लिए ट्रेडिंग प्लेटफार्म का उपयोग करता है और ये उम्मीद करता है कि 505 पर प्राइस जाने पर वह ट्रेड को स्क्वायर-ऑफ कर देगा।

अगर ट्रेडर X इंट्राडे ट्रेडिंग टाइम यानी की 3:15 से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ नही करता है तो ब्रोकर स्वचालित रूप से ट्रेड को ऑटो स्क्वायर-ऑफ कर देगा।

पोजिशन को स्क्वायर ऑफ कैसे करें?

ट्रेडिंग में, किसी मौजूदा पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करना बहुत आसान है ये आप अपने स्टॉक ब्रोकर के ऐप या प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी पोजिशन पर जाकर उसे स्क्वायर-ऑफ कर सकते है।

जैसे मान लीजिए आपने बैंक निफ्टी फ्यूचर को खरीदा है और कुछ समय बाद बैंक निफ्टी आपकी दिशा में चला गया है और अब आप प्रॉफिट बुक करना चाहते है तो अपनी पोजिशन पर जाकर सैल पर क्लिक करे, फिर आपके सामने एक विंडो खुल जायेगी, जिसमें आप चाहे तो मार्केट प्राइस पर सेल कर सकते है या खुद प्राइस डाल कर उस प्राइस तक बैंक निफ्टी के आने का इंतजार कर सकते है।

स्क्वायर-ऑफ टाइमिंग

ट्रेडिंग में Square off Meaning in Hindi को समझने के बाद आइए इसके लिए भारतीय स्टॉक मार्केट की स्क्वायर-ऑफ समय सीमा पर एक नजर डालते हैं।

दोपहर 03:15 बजे से 03:20 बजे के बीच, अधिकांश ब्रोकर द्वारा सभी स्टॉक और एफ एंड ओ होल्डिंग्स को स्क्वायर-ऑफ कर दिया जाता है।

जबकि करेंसी फ्यूचर्स का स्क्वायर-ऑफ टाइम शाम 4:45 बजे से शाम 4:50 बजे तक होता है।

इसके अलावा MCX का स्क्वायर-ऑफ टाइम मार्केट बंद होने से 30 मिनट पहले होता है। MCX के लिए स्क्वायर-ऑफ का समय लगभग 10:35 बजे और रात 11:20 बजे होता है।

ऑटो स्क्वायर ऑफ चार्ज क्या है?

यदि ब्रोकर आपकी ओपन पोजीशन को ऑटो स्क्वायर-ऑफ करता है, तो ऑटो स्क्वायर-ऑफ कॉस्ट के रूप में प्रत्येक ऑर्डर के लिए ब्रोकर आपको 20 से 50 रुपये (प्लस 18 प्रतिशत GST) का करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं? जुर्माना लगाता है।

तो यहाँ पर ब्रोकरेज के अतिरिक्त आपको स्क्वायर ऑफ चार्ज का भुगतान भी करना होता है जिससे आपका कमाया हुआ मुनाफा कम हो जाता है।

नतीजतन, आपको ऑटो स्क्वायर-ऑफ कॉस्ट को रोकने के लिए समय से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करना चाहिए।

Square Off Meaning in Option Trading

स्टॉक मार्केट में एक ट्रेडर या निवेश को ट्रेड करने के लिए बहुत से रास्ते खुले हुए है जिनमें इंट्राडे ट्रेडिंग, ऑप्शन ट्रेडिंग, फ्युचर ट्रेडिंग, पोजिशनल ट्रेडिंग आदि शामिल है, अभी तक हम square off meaning in hindi के बारे में समझ गए है लेकिन अभी हम ये देखते है कि स्क्वायर ऑफ ऑप्शन ट्रेडिंग में कैसे काम करता है।

ऑप्शन ट्रेडिंग में किसी भी स्टॉक या इंडेक्स में जब हम ट्रेड करते है तो हमें स्ट्राईक प्राइस, एक्सपायरी आदि चुननी होती है।

यानि की आप जो भी एक्सपायरी चुनेंगे आपको उस एक्सपायरी तिथि से पहले अपनी पोजिशन को Square Off करना होगा, नही तो वह पोजिशन खुद ब खुद Square Off हो जायेगी। जैसे कि हमने ऊपर ऊपर बताया है, अब इसे आसान शब्दों में समझते है.

मान लीजिये बैंक निफ्टी अभी 33500 पर चल रहा है और आपको लगता कि अगले महीने के अंत से पहले बैंक निफ्टी 35000 तक जा सकता है। इस स्थिती में आप 35000 का कॉल ऑप्शन अगले महिने की एक्सपायरी के लिए खरीद लेते है।

अभी आपकी पोजिशन की एक्सपायरी नजदीक है और बैंक निफ्टी 34000 पर है लेकिन आपने 35000 तक जाने की उम्मीद की थी।

इस स्थिती में आपको अपनी पोजिशन को एक्सपायरी से पहले Square Off करना होगा, नही तो आपके ऑप्शन की वैल्यु जीरो हो जायेगी। करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं? क्योंकि ऑप्शन एक्सपायरी के जितने नजदीक जायेगा उतनी ही तेजी से ऑप्शन की वैल्यु कम होती जायेगी।

नोट – ऑप्शन ट्रेडिंग में Weekly और Monthly एक्सपायरी होती है आप जिस भी एक्सपायरी को ट्रेड करने के लिए चुनते है आपको उस एक्सपायरी तिथि से पहले अपनी पोजिशन को Square Off करना होता है, फिर चाहे बह Weekly एक्सपायरी हो या फिर Monthly एक्सपायरी हो।

Square Off Meaning in Future Trading

एक हद तक फ्युचर और ऑप्शन की ट्रेडिंग प्रकिया समान होती है जैसे हम ऑप्शन खरीदने के एक निश्चित तिथि करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं? का चयन करते है ठीक इसी प्रकार फ्युचर ट्रेडिंग में भी हमें एक्सपायरी का चयन करना होता है। वस फर्क इतना है कि हमें फ्युचर ट्रेडिंग में स्ट्राईक प्राइस को चुनने की जरुरत नही पडती है।

फ्युचर ट्रेडिंग में आप अधिकतम तीन महीने के लिए फ्युचर कॉन्ट्रेट खरीद सकते है, इससे में भी एक्सपायरी तिथि से पहले आपको अपनी पोजिशन को Square Off करना होता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझते है।

मान लिजिए बैंक निफ्टी अभी 33700 पर चल रहा है और आपको लगता कि महीने के अंत से पहले बैंक निफ्टी 34000 तक जा सकता है। तव इस स्थिती में आप वर्तमान महीने की एक्सपायरी के साथ बैंक निफ्टी फ्युचर खरीद सकते है।

अव माना महीने के अंत में बैंक निफ्टी का प्राइस 33900 है तव आपको जो भी प्रॉफिट मिल रहा है उसे लेकर अपनी पोजिशन को Square Off कर सकते है, वही दूसरी तरफ अगर महीने के अंत में बैंक निफ्टी का प्राइस 33500 है तो इस स्थिती में आपको जितना भी नुकसान हो रहा है उससे के साथ अपनी पोजिशन को Square Off करना होगा।

निष्कर्ष

इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय, आपको समय का विशेष ध्यान देना है। अगर आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे है तो सुनिश्चित करे कि ऑटो स्क्वायर-ऑफ समय से पहले अपनी पोजिशन को स्क्वायर-ऑफ करे, जिससे कि ब्रोकर की पैनल्टी से बच सके।

शेयर मार्केट में निवेश करने हेतु आपको अलग-अलग टर्म से अवगत होना काफी आवश्यक है जिसके लिए आप हमारे द्वारा प्रदान ऑनलाइन स्टॉक मार्केट कोर्स ले सकते है।

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क्रिप्टो ऑप्शंस की OTC ट्रेडिंग करने वाला अमेरिका का पहला बड़ा बैंक बना Goldman Sachs

OTC ट्रेड में दो पार्टीज अन्य क्रिप्टोकरेंसीज या सामान्य करेंसी के लिए क्रिप्टो एसेट्स में सीधे ट्रेड करती हैं

क्रिप्टो ऑप्शंस की OTC ट्रेडिंग करने वाला अमेरिका का पहला बड़ा बैंक बना Goldman Sachs

OTC क्रिप्टो ऑप्शंस ट्रेडिंग में रिस्क अधिक है.

खास बातें

  • यह OTC प्रोडक्ट अमेरिका के किसी बड़े बैंक की ऐसी पहली पेशकश है
  • OTC ट्रेड में दो पार्टीज सीधे ट्रेड करती हैं
  • इस तरह के ट्रेड में रिस्क अधिक होता है

अमेरिका में क्रिप्टो ट्रेडिंग में बढ़ोतरी हो रही है. इसी कड़ी में Goldman Sachs ने इनवेस्टमेंट फर्म Galaxy Digital के साथ बिटकॉइन से जुड़े एक इंस्ट्रूमेंट की शुरुआत की है. यह ओवर-द-काउंटर (OTC) प्रोडक्ट अमेरिका के किसी बड़े बैंक की क्रिप्टो सेगमेंट में पहली पेशकश है. यह एक 'नॉन-डिलीवरेबल ऑप्शन' है. इसकी सेटलमेंट पहले से तय मैच्योरिटी की तिथि पर कैश में की जाएगी.

OTC ट्रेड में दो पार्टीज अन्य क्रिप्टोकरेंसीज या सामान्य करेंसी के लिए क्रिप्टो एसेट्स में सीधे ट्रेड करती हैं. इसमें बड़ी मात्रा में क्रिप्टो एसेट्स को बिना किसी इंटरमीडियरी के खरीदा जा बेचा जा सकता है. Galaxy Digital के को-प्रेसिडेंट, Damien Vanderwilt ने कहा, "Goldman Sachs का हमारी फर्म पर लगातार विश्वास हमारी एक्सपर्टाइज और इंस्टीट्यीशंस की ओर से बढ़ती डिमांड को पूरा करने की क्षमता का प्रमाण है." Goldman Sachs की शुरुआत 1869 में हुई थी. पिछले वर्ष इसने CME Group के साथ बिटकॉइन प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग शुरू की थी. इसके डिजिटल एसेट्स के एशिया पैसिफिक के हेड, Max Minton का कहना था, "Galaxy Digital के साथ हमारा पहला कैश में सेटलमेंट वाला क्रिप्टोकरेंसी ऑप्शंस ट्रेड के लिए जुड़कर हम खुश हैं. यह हमारी डिजिटल एसेट्स से जुड़ी क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति है."

Galaxy Digital जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स आमतौर पर अपने फंड को एसेट्स की बड़ी मात्रा में लगाते हैं. ये ट्रांजैक्शंस क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए होती हैं और इस वजह से व्यक्तिगत इनवेस्टर्स या इंस्टीट्यूशंस एक OTC सिस्टम में इसके लिए डेस्क से संपर्क कर सकते हैं. Coinbase Ventures के Connor Dempsey ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया, "उदाहरण के लिए, अगर आप बड़ी संख्या में बिटकॉइन खरीदने की कोशिश करते हैं तो आपको समस्या करेंसी फ्यूचर्स क्या हैं? हो सकती है. अगर आप यह पूरी खरीद एक एक्सचेंज पर करते हैं तो ऐसा हो सकता है कि इसे एक बार में न खरीदा जा सके और आपकी इसे कई सेलर्स से खरीदना पड़ सकता है."

Goldman Sachs ने पिछले वर्ष Galaxy Digital के साथ बिटकॉइन फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग शुरू की थी. हालांकि, इसकी नई OTC क्रिप्टो ऑप्शंस ट्रेडिंग में रिस्क अधिक है. इसमें Goldman Sachs के लिए क्रिप्टोकरेंसीज में वोलैटिलिटी एक समस्या हो सकती है. हाल के महीनों में कुछ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस ने क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर अपना रुख बदला है और ये इससे जुड़ी ट्रेडिंग में संभावना तलाश रहे हैं.

रुपया 48 पैसे टूटकर 81.26 प्रति डॉलर पर बंद, जानिए गिरावट की वजह

News18 हिंदी लोगो

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मुंबई. अमेरिकी करेंसी में सुधार तथा घरेलू शेयर मार्केट में सुस्ती के रुख को देखते हुए इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सोमवार को अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले रुपया (Rupee) 48 पैसे के गिरावट के साथ 81.26 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ. मार्केट सूत्रों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से भी कारोबारियों की धारणा प्रभावित हुई.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 80.53 पर मजबूत रुख लिए खुला. कारोबार के दौरान रुपये का आरंभिक लाभ लुप्त हो गया और अंत में यह अमेरिकी करेंसी के मुकाबले 48 पैसे की गिरावट के साथ 81.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले रुपये में 48 पैसों की गिरावट को दर्शाता है. शुक्रवार को रुपया 62 पैसे सुधरकर 80.78 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

अमेरिकी डॉलर में सुधार और घरेलू मार्केट्स में कमजोरी

शेयरखान बाय बीएनपी पारिबा के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिकी डॉलर में सुधार और घरेलू मार्केट्स में कमजोरी के रुख के कारण भारतीय रुपये में गिरावट आई. हालांकि, बेहतर वृहद आर्थिक आंकड़ों के कारण रुपया तेजी के साथ खुला था.’

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.63 फीसदी घटकर 95.93 डॉलर प्रति बैरल रह गया

इस बीच, दुनिया की 6 प्रमुख करेंसी की तुलना में डॉलर की कमजोरी या मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.59 फीसदी मजबूत होकर 106.91 पर आ गया. ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.63 फीसदी घटकर 95.93 डॉलर प्रति बैरल रह गया.

सेंसेक्स 170.89 अंक की गिरावट के साथ 61,624.15 अंक पर बंद

वहीं बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 170.89 अंक की गिरावट के साथ 61,624.15 अंक पर बंद हुआ. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) पूंजी बाजार में शुद्ध लिवाल रहे. उन्होंने शुक्रवार को 3,958.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

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