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विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति
महामारी के चलते दक्षिण एशिया में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति निवेश बढ़ा है। हमारे अन्य पड़ोसियों की बात करें विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति तो पाकिस्तान के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 6 फीसदी की गिरावट आई है। जिस वजह से वो घटकर 210 करोड़ डॉलर रह गया है। इसके बावजूद वहां एनर्जी और टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है। बांग्लादेश में 11 फीसदी और श्रीलंका में 43 फीसदी की कमी आई है।

इकोनॉमी के मोर्चे पर अच्छी खबर! भारत मौजूदा वित्त वर्ष में हासिल करेगा 100 अरब डॉलर का विदेशी निवेश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्माण विकास के क्षेत्र में मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन को मंजूरी दी.विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्माण विकास के क्षेत्र में मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा यह मंजूरी 29 अक्टूबर 2014 को दी गई. यह फैसला आम बजट में केंद्र सरकार की घोषणा के अनुरूप किया गया.

निर्माण क्षेत्र में संशोधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति परिपत्र 2014 के अनुसार, निर्माण विकास क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति होगी. साथ ही, निर्माण विकास क्षेत्र में निवेश विभिन्न शर्तों के विषयाधीन होगा.

निर्माण विकास क्षेत्र में संशोधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के उपायों से पूर्व की नीति में उपयोग की जा रही खंडीय शर्तों को सरल बनाने और नियमों के स्पष्टीकरण के फलस्वरूप निर्माण विकास क्षेत्र में प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है.

प्राइवेट बैंकों में 100 फीसदी FDI की तैयारी में सरकार

प्राइवेट बैंकों में 100 फीसदी FDI की तैयारी में सरकार

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2015,विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति
  • (अपडेटेड 17 सितंबर 2015, 1:21 PM IST)

विदेशी निवेश को और उदार बनाने के लिए सरकार निजी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है जो फिलहाल 74 प्रतिशत है.

सूत्रों के मुताबिक औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाने से जुड़ा प्रस्ताव वित्तीय सेवा विभाग को गौर करने के लिए भेजा है.

फिलहाल निजी क्षेत्र की बैंकिंग में 74 प्रतिशत की अनुमति है जिसमें से 49 प्रतिशत को स्वाभाविक मार्ग से और इससे अधिक के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के जरिए अनुमति मिलती है.

केंद्र सरकार का औषध निर्माण के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव करने का निर्णय

देसी दवा कम्पनियों को विदेशी कम्पनियों के अधिग्रहण की बढ़ती प्रवृत्ति से बचाने हेतु केंद्र सरकार ने एफडीआई नीति में बदलाव का निर्णय किया.

केंद्र सरकार औषध निर्माण के क्षेत्र में मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में बदलाव लाना चाहती है, ताकि विदेशी कम्पनियों द्वारा देसी कम्पनियों के अधिग्रहण की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर घरेलू जैनरिक उद्योग को बचाया जा सके. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस उद्देश्य के लिए 16 अगस्त 2013 को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की. बैठक में निर्णय किया गया कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इस सिलसिले में जल्द ही सलाह मशविरे की प्रक्रिया शुरू करे.

विदित हो कि बैठक के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनन्द शर्मा ने कहा कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड के समक्ष प्रस्तावों को मौजूदा नीति के तहत देखा जाना है.

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति

2019 की तुलना में 2020 में 26 फीसदी से ज्यादा बढ़ा एफडीआई

जहां 2019 के दौरान देश में 3.78 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ था वो 2020 में 25 फीसदी बढ़कर 4.74 लाख करोड़ पर पहुंच गया है

By Lalit Maurya

On: Monday 21 June 2021

विदेशी निवेशकों ने महामारी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में एक बार फिर भरोसा दिखाया है। जिसका सबूत है देश के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 2019 की तुलना में 2020 के दौरान 26 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। जहां 2019 में देश में हुआ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 3.78 लाख करोड़ रुपए (5,100 करोड़ डॉलर) था वो 2020 विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति में बढ़कर 4.74 लाख करोड़ (6,400 करोड़ डॉलर) पर पहुंच गया है। यह जानकारी यूएन कॉन्‍फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (यूएनसीटीएडी) द्वारा जारी वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2021 में सामने आई है।

यदि वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश हैं जहां इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश हुआ है। यदि वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत दुनिया का पांचवा ऐसा देश हैं जहां इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति निवेश हुआ है। हालांकि कोविड-19 का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दर्ज किया गया है। इसके बावजूद देश में निवेश में बढ़ोतरी हुई है, जिसकी सबसे बड़ी वजह मजबूत बुनियाद है, जिसने मध्‍यम अवधि के लिए उम्‍मीद की किरण को बरकरार रखा है।

भारतीय इकोनॉमी में तेज ग्रोथ

इसके अलावा आपको बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार जारी मजबूती का असर देखने को मिल रहा है. यूरोप में सुस्ती के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था की तेज ग्रोथ से भारत टॉप 5 इकोनॉमी में शामिल हो गया है. सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है और ब्रिटेन अब छठे पायदान पर है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर में की गई गणना के अनुसार भारत ने 2021 की आखिरी तिमाही में यूके को पीछे छोड़ा है.

वहीं, आईएमएफ के जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक 2022 की पहली तिमाही भारत ने अपनी बढ़त और मजबूत की है. अनुमानों के अनुसार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति इस ग्रोथ के साथ भारत सालाना आधार पर भी जल्द दुनिया की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. आईएमएफ के द्वारा जारी आंकड़ों और मार्च तिमाही के अंत में डॉलर के एक्सचेंज रेट के आधार पर ब्लूमबर्ग ने जानकारी दी है कि नॉमिनल कैश में भारतीय अर्थव्यवस्था का साइज 854.7 अरब डॉलर था.

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